केंद्रीय शिक्षा और कौशल विकास मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज कहा कि अनुशीलन समिति 20वीं सदी में बंगाल से संचालित एक प्रमुख गुप्त क्रांतिकारी समिति थी, जिसका मिशन औपनिवेशिक शासन को उखाड़ फेंकना और भारत के स्वतंत्रता संग्राम को गति प्रदान करना था। उन्‍होंने साहस, बलिदान और प्रेरणा के इस भवन पर तिरंगा फहराया।

श्री प्रधान ने कहा कि सतीश चंद्र प्रमथ मित्रा, अरबिंदो घोष और सरला देवी द्वारा स्थापित, अनुशीलन समिति बंगाल की पवित्र भूमि से जुड़ी विभिन्न शानदार संस्थानों में से एक थी, जिसने राष्ट्रवादी लेखन, प्रकाशन और स्वदेशी पर जोर देकर देश की अंतरात्मा को अभिव्यक्ति दी।

उन्होंने कहा कि देशबंधु चित्तरंजन दास, सुरेंद्रनाथ टैगोर, जतिंद्रनाथ बनर्जी, बाघा जतिन जैसे महान व्यक्ति अनुशीलन समिति से जुड़े थे। हेडगेवार भी समिति के पूर्व कार्यकर्त्ता थे। उन्होंने कहा कि मुझे विशेषकर अमृत महोत्सव के दौरान इन महानुभावों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

मंत्री ने एनसीईआरटी और शिक्षा जगत से आगामी राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा में अनुशीलन समिति के बारे में पर्याप्त जानकारी शामिल करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हमारी पाठ्यपुस्तकों में अनुशीलन समिति के इतिहास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी अगली पीढ़ी को प्रेरित करेगी।

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